
सिरोही। रामझरोखा मंदिर भूमि एवं पट्टा प्रकरण सहित लालबावरी, गुलाबनगर और चुंगी नाका से जुड़े चार मामलों की जांच रिपोर्ट को लेकर सिरोही की राजनीति गरमा गई है। पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जांच में वास्तविक तथ्यों को सामने लाने के बजाय जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया गया।
लोढ़ा ने रामझरोखा मंदिर की भूमि पर जारी किए गए आठ पट्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच में पुराने राजस्व रिकॉर्ड, पूर्व पट्टों और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की।
आठ पट्टों को लेकर उठाए सवाल
पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि मंदिर की भूमि से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद उनकी समुचित जांच नहीं की गई। उनका कहना है कि जांच का उद्देश्य केवल पट्टे जारी करने की प्रक्रिया में कथित कमियां तलाशना नहीं, बल्कि भूमि के वास्तविक स्वामित्व और पूरे घटनाक्रम की तथ्यात्मक स्थिति सामने लाना होना चाहिए।
लोढ़ा ने अधिकारियों की भूमिका और पट्टों से लाभान्वित लोगों की जिम्मेदारी की भी जांच किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि राजस्व रिकॉर्ड में भूमि की स्थिति स्पष्ट थी तो रिकॉर्ड दुरुस्त करना और आवश्यक राजस्व प्रक्रिया पूरी करना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी थी।
गुलाबनगर और चुंगी नाका मामलों पर भी सवाल
गुलाबनगर भूमि प्रकरण को लेकर लोढ़ा ने आरोप लगाया कि नगर परिषद की भूमि से संबंधित मामले में गलत तथ्यों अथवा दस्तावेजों के आधार पर पट्टे जारी किए जाने की स्थिति बनी। उन्होंने इससे नगर परिषद की संपत्ति और राजकोष को संभावित नुकसान की बात कहते हुए जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों और लाभार्थियों की भूमिका की गहन जांच की मांग की।
वहीं, चुंगी नाका प्रकरण में भी उन्होंने जमीन की वास्तविक स्थिति और प्रशासनिक प्रक्रिया की पूरी जांच नहीं होने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि संबंधित दस्तावेजों, निर्णयों और अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
बोले लोढ़ा—“पूरे कुएं में भांग घुली है”
चारों मामलों को लेकर पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “पूरे कुएं में भांग घुली है।” उन्होंने मुख्यमंत्री से चारों प्रकरणों की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की, ताकि किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के बिना वास्तविक तथ्य सामने आ सकें।
बीजेपी और मंत्री देवासी ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, बीजेपी ने लोढ़ा के आरोपों को निराधार, तथ्यहीन और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है। पार्टी का कहना है कि गंभीर आरोप लगाने के साथ उनके समर्थन में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करना भी जरूरी है। बीजेपी ने कहा कि यदि लोढ़ा के पास कोई दस्तावेज या प्रमाण हैं तो उन्हें संबंधित जांच एजेंसी अथवा सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए।
पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने भी आरोपों को निराधार और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि रामझरोखा मंदिर भूमि एवं पट्टा प्रकरण प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के अधीन है। यदि किसी मामले में अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि इन चारों प्रकरणों की जांच रिपोर्ट को लेकर उठे सवालों पर प्रशासन और सरकार की ओर से आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।




