
आबू रोड। ब्रह्माकुमारीज़ की पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि की 19वीं पुण्यतिथि 25 अगस्त को भारत सहित दुनिया के 140 देशों में ‘विश्व बंधुत्व दिवस’ के रूप में मनाई जाएगी। इस अवसर पर संस्थान के करीब छह हजार सेवाकेंद्रों पर सुबह से रात तक विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम और योग-साधना आयोजित की जाएगी।
आबू रोड स्थित ब्रह्माकुमारीज़ के मुख्यालय शांतिवन में अलसुबह 3 बजे विशेष योग-साधना से कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। सुबह 7 बजे सामूहिक सत्संग एवं मुरली क्लास होगी। इसके बाद सुबह 8:15 बजे संस्थान की वरिष्ठ पदाधिकारी दादी प्रकाशमणि के स्मृति स्थल प्रकाश स्तंभ पर पहुंचकर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।
सुबह 11:30 बजे दादीजी की स्मृति में परमात्मा को विशेष भोग अर्पित किया जाएगा। इस दौरान वरिष्ठ पदाधिकारी दादी प्रकाशमणि के साथ बिताए अपने अनुभव साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। स्मृति स्थल को विशेष रूप से फूलों से सजाया गया है।
38 वर्षों तक संभाली संस्थान की जिम्मेदारी
संस्थान के पदाधिकारियों के अनुसार दादी प्रकाशमणि का जन्म वर्ष 1922 में अविभाजित भारत के सिंध प्रांत में हुआ था। बचपन में उनका नाम रमा था। बचपन से ही उनका झुकाव आध्यात्मिकता और श्रीकृष्ण भक्ति की ओर था। बताया जाता है कि कम उम्र से ही वे नियमित रूप से पूजा-पाठ करती थीं और उनका स्वभाव शांत, सरल एवं विनम्र था।
लगभग 14 वर्ष की उम्र में वे संस्था के संपर्क में आईं और वर्ष 1936 में अपना जीवन आध्यात्मिक सेवा एवं मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने धार्मिक एवं आध्यात्मिक ग्रंथों का भी अध्ययन किया।
1969 में संभाली ब्रह्माकुमारीज़ की बागडोर
ब्रह्माकुमारीज़ के साकार संस्थापक प्रजापिता ब्रह्मा बाबा के अव्यक्त होने के बाद वर्ष 1969 में दादी प्रकाशमणि ने संस्थान की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2007 तक करीब 38 वर्षों तक मुख्य प्रशासिका के रूप में उन्होंने संस्थान का नेतृत्व किया।
संस्थान से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि उनके नेतृत्व में ब्रह्माकुमारीज़ की सेवाओं का विस्तार भारत से लेकर विश्व के अनेक देशों तक हुआ। राजयोग मेडिटेशन, आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति के संदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
दादी प्रकाशमणि के त्याग, सादगी, कुशल प्रशासन और विश्व बंधुत्व की भावना को आज भी संस्थान से जुड़े लाखों लोग प्रेरणा के रूप में याद करते हैं। उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रमों में देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग योग-साधना और श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में शामिल होंगे।




