
जयपुर: अजमेर. मौसम में अचानक हुए परिवर्तन का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है. सर्दी और शीतलहर के कारण लोग मौसमी बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं. अस्पतालों में सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार के मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है. खासकर इस मौसम में सूखी खांसी से भी लोग ज्यादा परेशान हैं
जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. रमाकांत दीक्षित ने ईटीवी से बातचीत में बताया कि सर्दी के मौसम में वातावरण में मौजूद निष्क्रिय वायरस सक्रिय हो जाते हैं, जो श्वास के साथ शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं. जिन लोगों के कमजोर फेफड़े हैं या अस्थमा के रोगी हैं, वे ठंडी हवा के कारण ज्यादा परेशान रहते हैं. उन्होंने बताया कि बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सर्दी से बचाव करके रहना चाहिए. सर्दी में गर्म कपड़े पहनने के साथ-साथ नाक, सिर और चेहरे को भी ढक कर रखना चाहिए, ताकि ठंडी हवाओं से बचा जा सके
डॉ. दीक्षित ने बताया कि इन दिनों सर्दी-जुकाम, बुखार, गले में दर्द-खराश, नाक बंद होना, सिर दर्द, बदन दर्द, सूखी खांसी और कमजोरी की शिकायतें आम हैं:
रोगी चार-पांच दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन दो से तीन हफ्ते तक सूखी खांसी रह सकती है. यह घबराने की बात नहीं है, कई बार खांसी ठीक होने में इतना समय लगता है. इसके बाद भी खांसी नहीं मिटती है तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए
शीतलहर में नाक, कान और सिर ढककर रखें:
डॉ. दीक्षित ने बताया कि रोगी गुनगुना पानी पिएं, गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करें और हल्दी, गुड़, अदरक व काली मिर्च का काढ़ा पिएं. ठंडे पेय पदार्थों का सेवन न करें. गर्म दूध, चाय, कॉफी या सूप पिएं और खाना गर्म खाएं. खट्टे फलों के सेवन से भी परहेज करें. अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें. आवश्यकता पड़ने पर गर्म कपड़े पहनें और नाक, कान व सिर को ढक कर रखें. कमजोर फेफड़े या अस्थमा के रोगी मास्क लगाकर रखें और इनहेलर का उपयोग करें
बुजुर्गों का रखें ध्यान:
डॉ. दीक्षित ने सुझाव दिया कि बुजुर्गों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए, खासकर शीतलहर से बचकर रहना चाहिए. जिन बुजुर्गों ने फ्लू वैक्सीन नहीं लगवाई है, उन्हें यह लगवा लेनी चाहिए. बुजुर्गों के अलावा बच्चों का भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत है, क्योंकि दोनों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है. ऐसे में उनके लिए सर्दी से बचाव बेहद जरूरी है


