
सरकार को 15 नवंबर तक अल्टीमेटम, नहीं निकला उचित समाधान तो हो सकता है उग्र आंदोलन…!
सिरोही। मेसर्स कमलेश मेटा कास्ट प्रा. लि. द्वारा प्रस्तावित चुनाव पत्थर खनन परियोजना के विरोध में अब आंदोलन नया मोड़ लेने जा रहा है। रविवार को भारजा गांव में संघर्ष समिति एवं चार ग्राम पंचायतों के करीब 12 गांवों के ग्रामीणों की संयुक्त बैठक हुई, जिसमें आगामी नें रणनीति पर गहन मंथन किया गया, और कई अहम फैसले हुये।
बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि यदि सिरोही जिले के जनप्रतिनिधि प्रदेश सरकार से 15 नवंबर तक मुख्यमंत्री से मिलने का समय नहीं ले पाये तो फिर जनता आगामी आंदोलन कों लेकर बड़ा कदम उठाएगी। जिले के जनप्रतिनिधि यदि 15 नवंबर तक मुख्यमंत्री स्तर पर इस मामले में संवाद कर समाधान नहीं कर पाते और खनन परियोजना को निरस्त करने की कार्रवाई नहीं होती, तो आंदोलन अब उग्र रूप ले सकता है..!
“क्षेत्र के जनप्रतिनिधि सुपुर्द करेंगे सामूहिक त्याग पत्र”
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सरकार ने क्षेत्रहित में निर्णय नहीं लिया, तो स्थानीय जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि और कार्यकर्ता सामूहिक रूप से अपने-अपने पदों से त्याग पत्र सौंपेंगे। संघर्ष समिति ने कहा कि खनन परियोजना किसी भी हालत में क्षेत्र में स्वीकार्य नहीं है, क्योंकि इससे क्षेत्र की पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक संरचना पर गंभीर असर पड़ेगा।

सरकार को खुली चेतावनी — “जनता का धैर्य अब टूटने को है”
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पिछले दो महीने से क्षेत्र की जनता और किसान, आदिवासी जनता शांति और संयम से आंदोलनरत है, लेकिन सरकार इस पूरे मुद्दे को हल्के में ले रही है। अब ग्रामीणों का कहना है कि जनता का धैर्य अधिक दिनों तक कायम नहीं रह पाएगा। यदि जल्द फैसला नहीं हुआ तो पिण्डवाड़ा, भीमाणा, भारजा, वाटेरा, रोहिड़ा सहित पूरे क्षेत्र और सिरोही जिले में आंदोलन की ज्वालामुखी फूट सकता है..!
परियोजना का पूर्ण विरोध — “यह क्षेत्र जनजीवन और पर्यावरण दोनों के लिए खतरा”
क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित खनन परियोजना से क्षेत्र के जलस्तर, खेती, पशुपालन और पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
संघर्ष समिति ने दोहराया कि विकास के नाम पर क्षेत्र की मूल पहचान और प्राकृतिक संतुलन के साथ खिलवाड़ किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं।

जनहित में मजबूत आवाज — “सरकार समय रहते ले संवेदनशील फैसला”
संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए सरकाऱ द्वारा किया गया MOU निरस्त हो, और पर्यावरणीय स्वीकृति रोकी जाए, प्रस्तावित खनन परियोजना को तत्काल प्रभाव से निरस्त करवाने कों लेकर कोर्ट में सरकारी स्तर पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए। ताकि क्षेत्र में शांति और विश्वास बना रहे।
ग्रामीणों ने कहा कि वे विकास विरोधी नहीं हैं, लेकिन यह परियोजना जनविरोधी है और इसके विरोध में अब पूरा क्षेत्र और जिला एकजुट है।




