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थाईलैंड में राजस्थान के युवकों को थर्ड डिग्री टॉर्चर, नौकरी के झांसे में चाइनीज कंपनियां चला रही मौत का गंदा खेल

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के दो युवकों का थायलैंड में थर्ड डिग्री टॉर्चर हुआ है. जिन्हें यहां से अच्छी नौकरी और बढ़िया सैलरी के नाम पर ले जाया गया था

राजस्थान के झुंझुनूं जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां के दो युवक विदेश में अच्छी नौकरी और मोटी कमाई का लालच लेकर थाईलैंड गए थे लेकिन वहां फंसकर मौत के मुंह से वापस लौटे. पौंख गांव के अक्षय मीणा और मणकसास गांव के शैलेष मीणा ने बताया कि कैसे एक छोटा सा झांसा उनके जीवन को नर्क बना गया. वे अब घर लौट आए हैं लेकिन उनकी आंखों में वो डर और दर्द अभी भी जिंदा है. यह कहानी हर उस युवा के लिए चेतावनी है जो बिना सोचे-समझे विदेशी नौकरियों के पीछे भागता है

नौकरी का मीठा झांसा

तीन महीने पहले सोशल मीडिया ऐप टेलीग्राम पर इन दोनों युवकों को डाटा एंट्री ऑपरेटर की नौकरी का ऑफर मिला. वेतन 80 हजार रुपए महीना था और एजेंटों ने वीजा तथा हवाई टिकट मुफ्त होने का वादा किया. लिंक पर क्लिक करने के बाद उन्होंने अपनी जानकारी दी. फिर एजेंट का फोन आया और अच्छी जिंदगी का सपना दिखाया. दोनों को यह बात सच्ची लगी. अगस्त महीने में वे दिल्ली से बैंकॉक के लिए निकल पड़े. लेकिन हकीकत कुछ और ही थी

बॉर्डर पर मौत का खेल

बैंकॉक पहुंचते ही एजेंटों ने कहा कि उन्हें थाईलैंड के दूसरे शहर ले जाया जा रहा है. रास्ता जंगलों से होकर गुजरा और वे थाईलैंड-म्यांमार सीमा पर केके पार्क पहुंच गए. यहां अवैध साइबर ठगी के कैंप चल रहे थे. युवकों को ठगी की ट्रेनिंग दी गई. उन्होंने मना किया तो टॉर्चर शुरू हो गया. उन्हें इंटरनेट से विदेशी लोगों को ठगने के लिए मजबूर किया. ठगी के तरीके थे फर्जी निवेश साइट्स लॉटरी ऑनलाइन डेटिंग और क्रिप्टो करेंसी के नाम पर

चाइनीज कैंपों का आतंक

ये कैंप चाइनीज कंपनियां चला रही हैं जहां भारत समेत कई देशों के हजारों लोग फंसे हैं. विरोध करने पर मारपीट होती है जेल में डाल दिया जाता है या 4-5 लाख रुपए में दूसरे एजेंटों को बेच दिया जाता है. इन युवकों ने भी यही सब सहा. वे बताते हैं कि काम न करने पर इलेक्ट्रिक शॉक दिया जाता है कई दिन भोजन नहीं मिलता और थर्ड डिग्री टॉर्चर से भी बदतर सजा होती है. देश भर से 2000 से ज्यादा युवा ऐसे कैंपों में फंसे हैं

गोलीबारी में बची जान

करीब 15 दिन पहले कैंप में गोलीबारी और बमबारी हुई. भगदड़ मच गई. कुछ युवक सीमा पार कर थाईलैंड पहुंच गए जबकि कई को स्थानीय माओवादियों ने मार डाला. अक्षय और शैलेष किसी तरह बचकर थाईलैंड पहुंचे. वहां से भारत सरकार ने मदद की. गृह मंत्रालय ने 500 से अधिक फंसे भारतीयों को वापस लाया

इन दोनों को जयपुर साइबर सेल को सौंपा गया. फिर एसपी के आदेश पर एसआई भींवाराम उन्हें जयपुर से गुढ़ागौड़जी थाने ले आए. मेडिकल जांच और कागजी काम के बाद परिजनों को सौंप दिया. एसआई भींवाराम ने कहा कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर दोनों को सुरक्षित घर पहुंचाया गया

नौकरियों के झांसे से बचे 

यह घटना बताती है कि विदेशी नौकरियों के ऑफर पर आंख बंद करके भरोसा न करें. जांच-पड़ताल जरूर करें वरना सपना मौत का जाल बन सकता है. सोशल मीडिया पर आने वाले ऐसे लिंक से सावधान रहें

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