
सिरोही के माधव विश्वविद्यालय में आयोजित ‘जनएआई कॉन्क्लेव–2026’ ने ग्रामीण भारत के लिए डिजिटल क्रांति का मार्ग प्रशस्त किया है। हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन के सहयोग से हुए इस भव्य आयोजन में एआई के माध्यम से कृषि, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर विशेषज्ञों ने मंथन किया। चांसलर हिम्मत सिंह देवल सहित कई दिग्गजों की उपस्थिति में ‘जन एआई ग्राम सेतु’ और ‘डिजिटल स्वदेशी आंदोलन’ जैसी अवधारणाओं के साथ ग्रामीण विकास की नई रूपरेखा तैयार की गई।
सिरोही। आधुनिक युग की सबसे बड़ी तकनीकी क्रांति अब केवल महानगरों के वातानुकूलित कमरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह राजस्थान के रेतीले धोरों और ग्रामीण अंचलों के अंतिम व्यक्ति के जीवन में उजाला फैलाएगी। सिरोही स्थित माधव विश्वविद्यालय के प्रांगण में ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ और हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘जनएआई कॉन्क्लेव–2026’ ने इसी संकल्प को साकार कर दिखाया है। “आर्थिक विकास एवं सामाजिक कल्याण के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता” के गंभीर विषय पर केंद्रित इस महाकुंभ ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि तकनीक को संवेदनशीलता के साथ जोड़ा जाए, तो ग्रामीण भारत की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती हैं। आयोजन की भव्यता और इसके पीछे छिपे ‘जन एआई ग्राम सेतु’ की अवधारणा ने उपस्थित विशेषज्ञों और विद्यार्थियों को एक ऐसे भविष्य की झलक दिखाई जहाँ स्वदेशी नवाचार और ग्राम स्वराज का संगम एआई के माध्यम से हो रहा है।
सम्मेलन की बौद्धिक गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन जैसे बुनियादी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर गहन मंथन हुआ। विशेषज्ञों ने स्वर में स्वर मिलाकर कहा कि एआई महज एक तकनीकी शब्द नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण युवाओं की महत्वाकांक्षाओं, महिलाओं के स्वावलंबन और कृषकों की समृद्धि का एक सशक्त माध्यम है। इस दौरान विशेष रूप से स्थानीय भाषाओं में विकसित एआई उपकरणों पर चर्चा की गई, जो भाषाई बाधाओं को तोड़कर रोजगार के नए द्वार खोलने की क्षमता रखते हैं। नवाचार प्रदर्शनी और संवादात्मक सत्रों ने स्थानीय अनुभवों को वैश्विक तकनीक से जोड़कर एक ऐसा मंच प्रदान किया, जहाँ भविष्य के ‘एआई प्रथम ग्राम’ और ‘जनएआई सामुदायिक राजदूतों’ की रूपरेखा तैयार की गई।
विश्वविद्यालय के चांसलर हिम्मत सिंह देवल ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में स्पष्ट किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की असली सार्थकता तभी है, जब इसका लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सुलभ हो। इसी विचार को विस्तार देते हुए प्रेसिडेंट डॉ. राजीव माथुर ने विश्वविद्यालय की सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। प्रो-प्रेसिडेंट डॉ. सुशील भार्गव, प्रॉक्टर डॉ. आदेश पाल और रजिस्ट्रार डॉ. भावेश कुमावत ने भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति देने में एआई की निर्णायक और भविष्योन्मुखी भूमिका को रेखांकित किया। होम्योपैथी विभाग की निदेशक डॉ. भारती देसाई ने स्वास्थ्य सेवाओं और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों में एआई के क्रांतिकारी प्रभावों पर प्रकाश डाला, जबकि ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट निदेशक डॉ. अतुल कुमार मिश्रा ने इसे ग्रामीण भारत की ओर बढ़ता एक दूरदर्शी कदम करार दिया।
बाहरी विशेषज्ञों ने भी इस कॉन्क्लेव को डिजिटल इंडिया के क्षेत्र में एक मील का पत्थर माना। हेड हेल्ड हाई फाउंडेशन के निदेशक देवाशीष ने इसे ‘डिजिटल स्वदेशी आंदोलन’ की संज्ञा दी, तो रेस्टी के निदेशक सामा राम ने स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित करने की वकालत की। ध्वनि रूरल इन्फॉर्मेशन सिस्टम के निहान मोहम्मद ने युवाओं के तकनीकी कौशल को सामाजिक नेतृत्व से जोड़ने पर बल दिया, वहीं कैटलिस्ट मैनेजमेंट सर्विसेज के डॉ. खुशवंत सिंह ने तकनीक के नैतिक और समावेशी उपयोग की आवश्यकता समझाई। इस पूरे आयोजन को सुव्यवस्थित और सफल बनाने में ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट प्रकोष्ठ की समर्पित टीम, जिसमें श्रवण, सूरज सिंह, प्राची, जयश्री, अयान, रयान, झानवी एवं फिरदौस शामिल थे, ने उल्लेखनीय श्रम किया। ‘जनएआई कॉन्क्लेव–2026’ का समापन इस दृढ़ विश्वास के साथ हुआ कि एआई अब समावेशी विकास का वह सूत्र बनेगा जो भारत के गांवों को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।



