जयपुर : “सिरोही में झोलाछापों का राज: CMHO को खबर, फिर भी कार्रवाई गायब — क्या स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से चल रहा मौत का खेल?”
“गरीबों की जान जाती रही, सिस्टम कमाई में व्यस्त: रोज़ खबरों के बावजूद सिरोही में झोलाछाप क्लीनिकों पर सख्ती क्यों नहीं?”

सिरोही (राजस्थान): पूरे जिले में अवैध रूप से संचालित झोलाछाप क्लीनिक आज भी खुलेआम मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इन झोलाछापों की जानकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. दिनेश खराड़ी को मिलने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई देखने को नहीं मिली है।
सूत्रों के अनुसार, सिरोही जिले के विभिन्न ब्लॉकों में ब्लॉक सीएमओ की शह पर झोलाछाप कारोबार फल-फूल रहा है। गांव–ढाणियों से लेकर कस्बों तक बिना डिग्री, बिना पंजीकरण और बिना किसी मेडिकल मान्यता के ये तथाकथित “डॉक्टर” इलाज के नाम पर इंजेक्शन, ड्रिप और खतरनाक दवाएं मरीजों को दे रहे हैं।
गरीबों की मौत, सिस्टम मौन
झोलाछाप क्लीनिकों की वजह से जिले में कई गरीब और असहाय लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की तरफ से न तो कोई बड़ी कार्रवाई होती है और न ही दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि
👉 ऊपरी कमाई (कमीशन) के चक्कर में
👉 निरीक्षण से पहले सूचना देकर
👉 और फाइलों में कार्रवाई दिखाकर
स्वास्थ्य विभाग मौत के इस खेल को नजरअंदाज कर रहा है।
हर रोज खबरें, फिर भी सख्ती क्यों नहीं?
मीडिया और समाचार पोर्टलों पर लगातार झोलाछाप क्लीनिकों की खबरें प्रकाशित हो रही हैं। बावजूद इसके,
🟢 क्लीनिक सील नहीं हो रहे
🟢 झोलाछाप गिरफ्तार नहीं हो रहे
🟢 जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं
🔹सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर प्रशासन सख्त क्यों नहीं?
🔹क्या यह लापरवाही है या संगठित भ्रष्टाचार?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिना विभागीय संरक्षण के यह संभव नहीं है।
यदि CMHO और ब्लॉक स्तर के अधिकारी ईमानदारी से चाहें तो
✔ 24 घंटे में क्लीनिक सील
✔ एफआईआर दर्ज
✔ मेडिकल एक्ट के तहत जेल
संभव है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या इच्छाशक्ति है?
जनता की मांग
अब सिरोही की जनता मांग कर रही है कि —
झोलाछाप क्लीनिकों पर तत्काल छापेमारी हो
CMHO और संबंधित ब्लॉक CMO की भूमिका की जांच हो
मृतकों के मामलों में न्यायिक जांच करवाई जाए
क्योंकि अगर आज भी कार्रवाई नहीं हुई, तो
👉 अगला मरीज
👉 अगली मौत
👉 और अगला जिम्मेदार
सब सिस्टम की इसी चुप्पी में दब जाएगा।
सवाल सिर्फ इतना है —
क्या सिरोही प्रशासन जागेगा, या झोलाछापों के साथ खड़ा रहेगा?



