
जयपुर: प्रदेश में पुराने 196 नगरीय निकायों में से 195 का कार्यकाल पूरा हो चुका है, जहां इलेक्शन पेंडिंग हैं. काम प्रभावित न हों, इसलिए इन निकायों में अभी प्रशासक लगाए गए हैं. अब प्रदेश में कुल 309 नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव कराने हैं, लेकिन इनके रास्ते में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को मिलने वाले राजनीतिक आरक्षण बड़ी संवैधानिक अड़चन है. ओबीसी आयोग ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए 31 मार्च का समय मांगा है. सर्वोच्च न्यायालय के अहम फैसले के अनुसार जब तक राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ‘ट्रिपल टेस्ट’ के माध्यम से ओबीसी की वास्तविक स्थिति और आंकड़े उपलब्ध नहीं कराता, तब तक उन्हें राजनीतिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता. यही वजह है कि प्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव अब पूरी तरह ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पर निर्भर हो गए
मंत्री बोले-सरकारी स्तर पर अड़चन नहीं:
इस मुद्दे पर यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने स्थिति स्पष्ट की और कहा कि नगरीय निकायों का जैसे-जैसे कार्यकाल पूरा हो रहा है, वहां प्रशासक लगाए जा रहे हैं. सरकार की ओर से चुनाव कराने में कोताही नहीं है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के चलते ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार जरूरी है. इसी फैसले के तहत प्रदेश में ओबीसी आयोग बनाया था. आयोग को पहली बार तय अवधि में रिपोर्ट देनी थी, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका. इसके बाद दिसंबर 2025 तक समय बढ़ाया, फिर भी आयोग तय अवधि में ट्रिपल टेस्ट पूरा नहीं कर पाया. ऐसे में आयोग ने फिर समय बढ़ाने की मांग की. इसे स्वीकारते हुए अब 31 मार्च 2026 तक का अंतिम समय दिया गया है
मंत्री ने दिलाया भरोसा:
यूडीएच मंत्री ने भरोसा दिलाया कि जैसे ही ओबीसी आयोग की रिपोर्ट आएगी, आरक्षण की लॉटरी 2 से 3 दिन में निकाल देंगे. इसके बाद पूरी प्रक्रिया राज्य निर्वाचन आयोग के पास होगी, जो तय करेगा कि चुनाव की तारीखें कब घोषित करनी हैं. सरकार के स्तर पर ऐसा कोई भी काम बाकी नहीं है, जिससे चुनाव टलें
निकायों में प्रशासक:
प्रदेश के अधिकांश शहरी निकायों में लंबे समय से प्रशासकों का शासन चल रहा है. चुना बोर्ड और महापौर नहीं होने के चलते लोकल गवर्नेंस, विकास कार्यों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है. शहरी क्षेत्रों में अब निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की मांग उठ रही है
प्रदेश में नगरीय निकायों की मौजूदा स्थिति:
49 नगरीय निकाय-कार्यकाल नवंबर 2024 में समाप्त
6 नगरीय निकाय-कार्यकाल नवंबर 2025 में समाप्त
50 नगरीय निकाय-कार्यकाल दिसंबर 2025 में समाप्त
90 नगरीय निकाय-कार्यकाल जनवरी 2026 में समाप्त
1 नगरीय निकाय-कार्यकाल फरवरी 2026 तक
आगे यह चुनौती: अभी प्रदेश का बड़ा हिस्सा प्रशासनिक नियंत्रण में है, जबकि चुनावी प्रक्रिया ओबीसी आयोग की रिपोर्ट के इंतजार में रुकी है. अब सबकी नजरें 31 मार्च की डेडलाइन पर टिकी हैं. इस बार भी ओबीसी आयोग रिपोर्ट देने में असफल रहता है तो नगरीय निकाय चुनाव और टल सकते हैं. दूसरी ओर रिपोर्ट आते ही राज्य निर्वाचन आयोग के सामने एक राज्य एक चुनाव कराने की चुनौती खड़ी होगी




