राष्ट्रपति भवन की मेहमान बनीं सीकर की संतोष देवी; कभी भैंस बेच शुरू की थी खेती, अब करती हैं 40 लाख सालाना कमाई
सीकर जिले की संतोष देवी खेदड़, जिन्होंने भैंस बेचकर खेती शुरू की थी, गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति भवन में हुए मशहूर 'एट होम' कार्यक्रम में खास मेहमान थीं

देश के 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर राष्ट्रपति भवन में हुए प्रतिष्ठित ‘एट होम’ कार्यक्रम में देश भर से चुने हुए खास मेहमानों को बुलाया गया था. इन अतिथियों की सूची में राजस्थान सहित विभिन्न राज्यों के किसानों को फंक्शन में शामिल होने का खास न्योता मिला था. इसमें हिस्सा लेने वालों में सीकर जिले की संतोष देवी खेदड़ भी शामिल हैं. जो जिले और राज्य के लिए गर्व की बात रही
भैंस बेचकर की खेती की शुरुआत
सीकर जिले के बेरी गांव की संतोष देवी खेदड़ को उनकी नई खेती की रिसर्च के आधार पर इस समारोह का हिस्सा बनने के लिए चुना गया. महिला किसान संतोष देवी खेदड़ की रिसर्च खास तौर पर राजस्थान के रेतीले धोरों जैसे मुश्किल इलाकों में सेब और अनार की एडवांस्ड बागवानी पर केंद्रित करती है. साल 2008 में उन्होंने महज 5 बीघा जमीन पर बागवानी खेती की शुरुआत की.अनार की खेती के लिए उन्होंने अपनी एकमात्र भैंस तक बेच दी और उधार लेकर ड्रिप सिंचाई व्यवस्था खड़ी की. उन्होंने आधुनिक और ज़्यादा पैदावार वाले बागवानी सिस्टम पर अपनी रिसर्च के जरिए, वह यह बात सामने लाई है कि सीमित संसाधनों में भी नई चीजों से खेती को फायदेमंद बनाया जा सकता है
सीमित संसाधनों में बड़ी सफलता
इस रिसर्च के आधार पर, वह अभी फलों के पौधों की नर्सरी चला रही हैं. आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों से खेती करके, वह अभी लगभग 40 लाख रुपये सालाना कमा रही हैं. उनकी कोशिशों से दूसरे किसानों के लिए भी अपनी आय बढ़ाने और वैज्ञानिक बागवानी में हाथ आजमाने के बहुत सारे खुलेंगे. उनकी सफलता में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), अटारी (ATARI) और कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) फतेहपुर की भूमिका बहुत अहम रही है, जिन्होंने सिलेक्शन प्रोसेस के दौरान संतोष देवी खेदड़ को खेती के मॉडर्न तरीकों से पहचान करवाई और उनके साथ इनमें प्रयोग करने में उनकी मदद की
मेहनत का कमाल
पांचवीं तक पढ़ी-लिखी संतोष खेदड़ ने यह साबित कर दिया कि शिक्षा की कमी कभी आत्मविश्वास और मेहनत की राह में बाधा नहीं बन सकती. इस सम्मान पर संतोष देवी खेदड़ ने राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि देश के प्रगतिशील किसानों और कृषि नवाचारों की सामूहिक पहचान है




