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जयपुर: कब्रिस्तान में शव दफनाने से रोका, 8-10 घंटे घर में पड़ी रही लाश, मुस्लिम समाज में आक्रोश

85 वर्षीय नजीर खान का शव दफनाने से रोक दिया गया. स्थानीय लोगों ने विरोध कर दावा किया कि जमीन पार्क की है. पुलिस ने शव दफनाने की अनुमति नहीं दी. 8-10 घंटे तक शव घर में रखा रहा

राजधानी जयपुर में शव दफनाने को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. प्रताप नगर इलाके के कब्रिस्तान में शव दफनाने से रोक दिया गया, जिसके बाद डेड बॉडी को कब्रिस्तान से वापस घर लौटा दिया गया. मामला रविवार दोपहर का बताया जा रहा है. मुस्लिम पक्ष ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है

परिजनों का आरोप है कि प्रताप नगर के श्योपुर निवासी रसीद खान के पड़ोसी नजीर खान (85) का निधन होने के बाद दोपहर करीब 1 बजे हल्दीघाटी गेट स्थित महिला पॉलिटेक्निक कॉलेज के पीछे बने कब्रिस्तान में शव लेकर पहुंचे थे. दफन की प्रक्रिया के दौरान स्थानीय लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और दावा किया कि यह जमीन पार्क की है, जबकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि 1991 से वहां कब्रिस्तान मौजूद है

पुलिस ने शव दफनाने की अनुमति नहीं दी

सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोप है कि मामला शांत कराने के नाम पर शव दफनाने की अनुमति नहीं दी गई और शव को वापस घर भेज दिया गया. बताया जा रहा है कि करीब 8-10 घंटे तक शव रखा रहा, जबकि मुस्लिम पक्ष संबंधित थाने में बैठकर कार्रवाई की मांग करता रहा

मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि न तो उनकी शिकायत दर्ज की गई और न ही शव रोकने वाले लोगों पर कोई कार्रवाई हुई. उन्होंने कब्रिस्तान के सदियों पुराने दस्तावेज थाने में पेश किए, लेकिन इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई. प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं

पुलिस का पक्ष

वहीं, इस पूरे मामले पर पुलिस का कहना है कि प्रताप नगर थाने में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है. पुलिस का दावा है कि यह केवल छोटी-मोटी बात थी, जिसे बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जा रहा है. वहीं मामले को लेकर मुस्लिम पक्ष की ओर से एक वीडियो भी जारी किया गया है, जिसमें कुछ लोग थाने के बाहर खड़े होकर मामले की जानकारी दे रहे हैं. लोगों का आरोप है कि अब तक शव को दफनाने नहीं दिया गया है और न ही प्रशासन की ओर से मामले में कोई कार्रवाई की गई

यह मामला संवेदनशील है और धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है. अगर कब्रिस्तान की जमीन को लेकर विवाद है तो प्रशासन को इसे प्राथमिकता से हल करना चाहिए. किसी भी धर्म में मृतक के अंतिम संस्कार में बाधा डालना गंभीर मामला माना जाता है. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है

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