
भीलवाड़ा में भाजपा प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने प्रेस वार्ता कर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मनरेगा को कांग्रेस का ‘भ्रष्टाचार एटीएम’ बताते हुए कहा कि मोदी सरकार का नया ‘वीबी जी राम जी’ विधेयक अब इस पर डिजिटल ताला लगाएगा। जानें कैसे 125 दिन का रोजगार, साप्ताहिक भुगतान और एआई-जीपीएस तकनीक ग्रामीण विकास का नया ढांचा तैयार करेगी और बिचौलियों का खात्मा करेगी।
भीलवाड़ा। राजस्थान की वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में आज उस समय सियासी पारा चढ़ गया जब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने एक प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस के दशकों पुराने किलों पर तीखा प्रहार किया। भाजपा जिला कार्यालय में आयोजित इस गरमागरम प्रेस कॉन्फ्रेंस में बगड़ी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस कांग्रेस ने मनरेगा जैसी योजनाओं को वर्षों तक भ्रष्टाचार का ‘एटीएम’ बनाकर रखा, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने ‘वीबी जी राम जी’ विधेयक के माध्यम से उस पर एक अभेद्य ‘डिजिटल ताला’ लगा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों तक देश की संपत्तियों को एक ही परिवार की जागीर समझने वाली कांग्रेस को आज विकसित भारत के संकल्प से पीड़ा हो रही है, जबकि यह नया ढांचा 2047 के स्वर्णिम भारत की नींव रखने जा रहा है।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर मंच पर जिला प्रभारी संजय जैन ताऊ, जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा, विधायक गोपाल खंडेलवाल, जब्बर सिंह सांखला, लादूलाल पीतलिया, और लालाराम बैरवा जैसे कद्दावर नेता मौजूद रहे। साथ ही वीबी जीरामजी के जिला संयोजक बाबूलाल आचार्य और जिला प्रवक्ता अंकुर बोरदिया ने भी अपनी उपस्थिति से इस संवाद को मजबूती प्रदान की। प्रदेश महामंत्री बगड़ी ने आंकड़ों की बाजीगरी को ध्वस्त करते हुए बताया कि जहाँ कांग्रेस केवल संस्थानों के नाम नेहरू-गांधी परिवार पर रखने में व्यस्त रही, वहीं मोदी सरकार ने ‘राजभवन’ को ‘लोकभावन’ और ‘राजपथ’ को ‘कर्तव्य पथ’ बनाकर व्यक्ति पूजा के स्थान पर सेवा की राजनीति को प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि मनरेगा के नाम पर 2024-25 में हुए 193.67 करोड़ रुपये के गबन ने इसे भ्रष्टाचार का पर्याय बना दिया था, जिसे सुधारने के लिए मोदी सरकार ने अब तक 8.53 लाख करोड़ रुपये सीधे मजदूरों के हितों में खर्च किए हैं।
‘जी राम जी’ विधेयक की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए बगड़ी ने कहा कि अब ग्रामीण परिवारों को 100 के स्थान पर 125 दिन का रोजगार मिलेगा, जिससे उनकी आय में 25 प्रतिशत की सीधी वृद्धि सुनिश्चित होगी। वन क्षेत्रों में रहने वाले अनुसूचित जनजाति के कामगारों के लिए यह सीमा 150 दिन की गई है। सबसे क्रांतिकारी बदलाव के रूप में अब मजदूरों को पखवाड़े भर का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि हर हफ्ते भुगतान किया जाएगा। भ्रष्टाचार को समूल नष्ट करने के लिए एआई, जीपीएस और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लिया जाएगा, जिससे बिचौलियों का धंधा पूरी तरह बंद हो जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बुआई और कटाई के समय श्रमिकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 60 दिनों की ‘नो वर्क’ अवधि का प्रावधान किया गया है, जो किसानों और मजदूरों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा।
प्रेस वार्ता के अंतिम चरण में बगड़ी ने विपक्ष के भ्रम को तोड़ते हुए कहा कि इस योजना को 60:40 के अनुपात में केंद्र प्रायोजित बनाकर राज्यों की जवाबदेही तय की गई है, जो सहकारी संघवाद का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान जिला प्रवक्ता मनोज बुलानी, शशांक बिड़ला, अभिश्रुता सोलंकी, अनिल सिंह जादौन सहित सोशल मीडिया जिला संयोजक रागिनी गुप्ता और सहसंयोजक महेंद्र नायक ने भी इस विजन को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया। यह प्रेस वार्ता न केवल कांग्रेस पर एक बड़ा हमला थी, बल्कि इसने भीलवाड़ा की धरती से आगामी ‘विकसित भारत’ के उस खाके को भी प्रदर्शित किया जहाँ अब केवल गड्ढे नहीं खोदे जाएंगे, बल्कि जल सुरक्षा और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे का निर्माण होगा।




