
राजस्थान के सिरोही जिले में अरावली पर्वतमाला को खनन माफियाओं से बचाने के लिए ‘अरावली बचाओ आंदोलन’ ने अब उग्र रूप ले लिया है। क्षेत्र में प्रस्तावित ‘कमलेश मेटा खनन परियोजना’ को लेकर स्थानीय जनता में भारी रोष है। इस परियोजना के विरोध में अब राष्ट्रीय पशुपालक संघ के अध्यक्ष लालजी राईका खुलकर मैदान में उतर आए हैं।
आज एक वीडियो संदेश जारी करते हुए लालजी राईका ने सिरोही जिले की जनता से वादा किया कि जब तक केंद्र सरकार इस विनाशकारी खनन परियोजना को पूरी तरह निरस्त नहीं कर देती, तब तक यह आंदोलन थमने वाला नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अरावली न केवल पर्यावरण का आधार है, बल्कि यह हजारों पशुपालकों और स्थानीय निवासियों की आजीविका और आस्था से भी जुड़ी है।
केंद्र सरकार से गुहार और चेतावनी
लालजी राईका ने अपने संबोधन में कहा कि सिरोही जिले की जनता अब पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस प्रोजेक्ट को तुरंत रद्द नहीं किया गया, तो 28 जनवरी पूरे जिले के पशुपालक और आम जनता सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होगी।
जनता के साथ खड़े रहने का संकल्प
जारी किए गए वीडियो में लालजी राईका सिरोही जिले की जनता से फिर से वादा करते नजर आए कि वे इस लड़ाई में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। उन्होंने जिले भर के कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों से एकजुट होने का आह्वान किया है। आंदोलनकारियों का कहना है कि कमलेश मेटा खनन परियोजना से पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन और केंद्र सरकार इस बढ़ते विरोध और चेतावनी के बाद क्या कदम उठाती है। फिलहाल, सिरोही जिले में ‘अरावली बचाओ आंदोलन’ की गूंज तेज हो गई है।



