
जयपुर: जोधपुर एक समय था जब भारतीय घरों में कांसे और पीतल के बर्तन ही मुख्य रूप से इस्तेमाल होते थे. इनमें बना भोजन न सिर्फ स्वादिष्ट लगता था, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता था, लेकिन 1980 के दशक से स्टील के बर्तनों का चलन बढ़ा और कांसे के बर्तन धीरे-धीरे आम घरों से गायब हो गए. आज बहुत कम घरों में ये मिलते हैं, हालांकि शगुन या पूजा-पाठ के लिए कुछ कांसे के बर्तन जरूर रखे जाते हैं, लेकिन दैनिक उपयोग में ये अब दुर्लभ हो गए हैं
हाल ही में जोधपुर के रामलीला मैदान में आयोजित पश्चिमी राजस्थान हस्तशिल्प उद्योग उत्सव में कांसे के बर्तनों की प्रदर्शनी ने लोगों का ध्यान खींचा. इन बर्तनों को देखकर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी कहा कि कभी हर घर में ये बर्तन होते थे और इनमें बना भोजन अमृत जैसा होता है. इस उत्सव ने एक बार फिर कांसे की पुरानी परंपरा को जीवंत कर दिया
कांसे के बर्तनों की मांग फिर बढ़ी:
जोधपुर में कांसे के बर्तन बनाने की परंपरा सदियों पुरानी है. कंसारा परिवार पीढ़ियों से इस कला को संजोए हुए है. परिवार के सदस्य शिरीष कंसारा बताते हैं कि हमारे पुराने ग्रंथों में स्पष्ट लिखा है, भोजन पीतल में बनाएं और कांसे में खाएं. कांसे में खाने से तांबे और टिन के सूक्ष्म कण शरीर में जाते हैं, जो कॉपर की मात्रा को संतुलित रखते हैं. ये बर्तन पूरी तरह लेड-फ्री होते हैं, इसलिए स्वास्थ्य के लिए बहुत सुरक्षित और लाभकारी हैं
कांसा क्या है और कैसे बनता है:
शिरीष कंसारा ने बताया कि कांसा एक मिश्रित धातु है, जो तांबे (कॉपर) और टिन से मिलकर बनती है. आमतौर पर इसमें 78% तांबा और 22% टिन होता है. तांबा इसे शुद्धता देता है, जबकि टिन मजबूती प्रदान करता है. ये बर्तन जंग नहीं लगने देते, लंबे समय तक चलते हैं और भोजन को लंबे समय तक गर्म रखते हैं. तांबे की वजह से इनमें प्राकृतिक रोगाणुरोधी गुण होते हैं, जो बैक्टीरिया, वायरस और फंगस को बढ़ने नहीं देते. इससे भोजन ताजा और सुरक्षित रहता है
कांसे के बर्तन के फायदे:
आयुर्वेद में कांसे को बुद्धिवर्धक भी माना गया है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है, सूजन कम करता है और शरीर के तीनों दोषों (वात, पित्त, कफ) को संतुलित रखता है. डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय के रस शास्त्र के सहायक आचार्य डॉ रवींद्र प्रताप सिंह ने बताया कि कांसे में उष्ण और लघु गुण होते हैं जो स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा होता है. पाचन जल्दी होता है. आंतों की व्याधि, चर्म रोग, संक्रमण में फायदेमंद होता है. इसके अलावा पित्त भी निकालने में सहायक है
महंगे लेकिन फिर बढ़ रही मांग:
बाजार में कांसे के बर्तन करीब 4500 रुपये प्रति किलो के भाव मिल रहे हैं. तांबे की कीमत बढ़ने से ये महंगे हो गए हैं, इसलिए अब ये मुख्य रूप से बड़े घरों या पारंपरिक रेस्तरां में दिखते हैं, लेकिन पिछले एक साल में सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने से लोग चांदी के बर्तनों की जगह कांसे की ओर मुड़ रहे हैं. पिछले सात महीनों में इनकी बिक्री में अच्छी बढ़ोतरी हुई है. लोग इन्हें रोजाना इस्तेमाल करने लगे हैं, क्योंकि ये स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ टिकाऊ भी हैं




