
सिरोही। कहते हैं डॉक्टर भगवान का रूप होता है, लेकिन सिरोही जिले के ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में पिछले तीन दशकों से ‘यमदूत’ खुलेआम घूम रहे हैं। जिले में चिकित्सा विभाग की नाक के नीचे सैकड़ों झोलाछाप डॉक्टर अपनी दुकानें सजाए बैठे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से कई तो पिछले 30 सालों से इस अवैध कारोबार में जमे हुए हैं, लेकिन जिले के स्वास्थ्य महकमे और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही।
30 साल का अनुभव या 30 साल की अवैध वसूली?
जिले के आबूरोड, रेवदर, शिवगंज, पिंडवाड़ा और स्वरूपगंज जैसे इलाकों में ऐसे कई झोलाछाप सक्रिय हैं, जिनके पास न तो कोई वैध डिग्री है और न ही अनुभव, फिर भी वे धड़ल्ले से मरीजों को ड्रिप चढ़ा रहे हैं, एंटीबायोटिक्स दे रहे हैं और यहाँ तक कि छोटे-मोटे ऑपरेशन भी कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जो झोलाछाप 30 साल से ‘राज’ कर रहे हैं, उन्हें अब तक ‘रिटायर’ (बंद) क्यों नहीं किया गया?

क्या सिस्टम की मेहरबानी है वजह?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम कभी-कभार खानापूर्ति के लिए सर्वे करती है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल नोटिस देकर छोड़ दिया जाता है। चर्चा तो यहाँ तक है कि इन अवैध क्लीनिकों से विभाग के कुछ नुमाइंदों तक ‘मासिक नजराना’ पहुँचता है। अगर ऐसा नहीं है, तो फिर क्या वजह है कि तीन दशक बीत जाने के बाद भी इन झोलाछापों का नेटवर्क ध्वस्त नहीं हो पाया?

गरीबों की जान से खिलवाड़
सिरोही जिले के दूर-दराज के गांवों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की कमी का फायदा ये झोलाछाप उठाते हैं। अनपढ़ और गरीब ग्रामीण इनके झांसे में आ जाते हैं। कई बार गलत इंजेक्शन या गलत दवा के कारण मरीजों की जान पर बन आती है, लेकिन रसूख और सांठ-गांठ के चलते ये झोलाछाप हर बार बच निकलते हैं।

CMHO साहब से सीधे सवाल:
1. क्या विभाग के पास इन 30 सालों से सक्रिय झोलाछापों की कोई सूची है?
2. समय-समय पर होने वाली ‘छापेमारी’ की खबरें केवल अख़बार की सुर्खियों तक ही क्यों सीमित रहती हैं?
3. क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है, उसके बाद ही इन पर स्थायी प्रतिबंध लगेगा?
4. आम जनता के टैक्स के पैसे से वेतन पाने वाले अधिकारी इन अवैध डॉक्टरों को संरक्षण देने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं करते?

जनता की मांग:
सिरोही की जनता अब थक चुकी है। लोगों की मांग है कि जिले में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाए जो केवल इन झोलाछापों के सफाए के लिए काम करे। 30 साल का यह ‘काला साम्राज्य’ अब खत्म होना चाहिए ताकि जिले के किसी गरीब को अपनी जान न गंवानी पड़े।
अब देखना यह है कि सिरोही जालौर न्यूज़ के बाद CMHO साहब और प्रशासन की नींद खुलती है या ये झोलाछाप अगले 10 साल और इसी तरह मौत का व्यापार करते रहेंगे।




