
स्वरूपगंज (सिरोही)। राजस्थान के सिरोही जिले के स्वरूपगंज क्षेत्र में रेलवे जंक्शन की बढ़ती मांग और चर्चाओं के बीच अब एक नया स्वर गूंजने लगा है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि केवल जंक्शन बन जाने से आम जनता के जीवन में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा। असली जरूरत इस क्षेत्र की जीवनरेखा ‘अरावली पर्वतमाला’ को बचाने की है।
विकास या विनाश? जनता के बीच छिड़ी बहस
स्थानीय लोगों का तर्क है कि स्वरूपगंज जंक्शन बनने से रेल सुविधाओं में विस्तार तो होगा, लेकिन इसका वास्तविक लाभ गरीब जनता तक पहुँचना संदेहास्पद है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि विकास के नाम पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार, यदि अरावली की पहाड़ियां सुरक्षित रहेंगी, तभी इस क्षेत्र का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
साधु-संतों और गरीबों के लिए अरावली है जीवन का आधार
आबू पर्वत और स्वरूपगंज के आसपास के क्षेत्रों में निवास करने वाले साधु-संतों ने भी पर्यावरण संरक्षण पर जोर दिया है। संतों का कहना है कि अरावली न केवल एक पर्वत श्रृंखला है, बल्कि यह आध्यात्मिकता और शांति का केंद्र है। पहाड़ों के कटने और पर्यावरण के नुकसान से सबसे ज्यादा प्रभावित गरीब तबका और यहां की जैव विविधता होगी।
एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हमें जंक्शन से ज्यादा चिंता अपनी अरावली की है। यदि पहाड़ और जंगल बचेंगे, तो पानी के स्रोत बचेंगे और शुद्ध हवा मिलेगी। असली फायदा गरीब जनता और आबू के संतों को अरावली के संरक्षण से ही होगा।”
प्रशासन से पर्यावरण बचाने की मांग
क्षेत्र की जनता अब सरकार और प्रशासन से मांग कर रही है कि विकास की योजनाओं में पर्यावरण को प्राथमिकता दी जाए। अरावली में बढ़ते अतिक्रमण और खनन की गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग भी तेज हो गई है। लोगों का स्पष्ट संदेश है कि यदि प्रकृति बचेगी, तभी मानव जीवन समृद्ध होगा।
अब देखना यह है कि प्रशासन विकास की इस दौड़ में स्थानीय लोगों की इन भावनाओं और पर्यावरण की सुरक्षा को कितनी अहमियत देता है।




