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सिरोही : झोलाछाप के पास ‘मौत का सामान’: खुलेआम बिक रही हैं दवाइयां, क्या बड़े दवा व्यापारियों और ड्रग विभाग की मिलीभगत से चल रहा है यह खेल?

सिरोही : ड्रग इंस्पेक्टर की लापरवाही: क्या मोटी साठ-गांठ के चलते नहीं हो रही कार्रवाई?

  • सफेदपोश दवा व्यापारियों का काला खेल: झोलाछाप के हाथों में थमा दी ‘जहर’ की पुड़िया!

  • ड्रग विभाग की ‘अंधी गली’: न झोलाछाप दिखते हैं, न उनके अवैध सप्लायर!

  • बिना लाइसेंस, बिना डिग्री, खुले बाजार में दवाओं की मंडी; कहाँ सो रहा है प्रशासन? 

सिरोही जिले के शहर और ग्रामीण इलाकों में इन दिनों स्वास्थ्य के नाम पर मौत का काला कारोबार फल-फूल रहा है। बिना किसी डिग्री या लाइसेंस के, ‘झोलाछाप’ (अयोग्य व्यक्ति) अपनी दुकानों में किसी जनरल स्टोर की तरह दवाइयां सजाए बैठे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इन झोलाछापों को बड़ी मात्रा में दवाइयों की सप्लाई कौन कर रहा है? क्यों ड्रग विभाग उन थोक दवा व्यापारियों पर कार्रवाई नहीं कर रहा, जो बिना लाइसेंस के इन अवैध ठिकानों तक दवाइयां पहुंचा रहे हैं?

बिना नियमों के सजी हैं ‘मौत की दुकानें’

नियमों के अनुसार, कोई भी दवा बिना रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट और वैध ड्रग लाइसेंस के नहीं बेची जा सकती। लेकिन सिरोही जिले शहर के बाजारों में नजारा बिल्कुल उल्टा है। झोलाछाप डॉक्टरों के ठिकानों पर एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड और नशीली दवाएं खुलेआम रखी हुई हैं। न तो दवाइयों के रखरखाव के लिए फ्रिज की व्यवस्था है और न ही एक्सपायरी चेक करने का कोई सिस्टम।

सप्लाई चेन पर बड़ा सवाल: आखिर इन्हें दवा कौन दे रहा है?

सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जिन दवाओं को खरीदने के लिए आम आदमी को डॉक्टर के पर्चे की जरूरत होती है, वे दवाएं इन झोलाछापों के पास पेटी भर-भर कर कहाँ से आ रही हैं? सूत्रों की मानें तो शहर के कुछ रसूखदार ‘दवा व्यापारी’ और ‘थोक विक्रेता’ (Wholesalers) चंद रुपयों के मुनाफे के लिए बिना बिल के इन झोलाछापों को दवाइयां सप्लाई कर रहे हैं। इन व्यापारियों पर कार्रवाई न होना ड्रग विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

ड्रग इंस्पेक्टर की चुप्पी… डर या साठ-गांठ?

हैरानी की बात है कि जिन रास्तों से ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी रोजाना गुजरते हैं, उन्हीं रास्तों पर ये अवैध क्लीनिक और दवा की दुकानें चल रही हैं। शिकायतों के बावजूद अधिकारी इन झोलाछापों और उनके सप्लायर्स पर हाथ डालने से कतरा रहे हैं। क्या ड्रग विभाग को इन थोक व्यापारियों का संरक्षण प्राप्त है? या फिर किसी ‘महीने वाली डील’ के तहत आंखें मूंद ली गई हैं?

खतरनाक परिणामों की चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि झोलाछापों द्वारा दी जा रही गलत डोज और बिना मानक वाली दवाएं मरीजों के किडनी और लीवर को फेल कर रही हैं। कई बार एक्सपायरी दवाएं देने से मरीजों की जान पर बन आती है। इसके बावजूद प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।

जनता की मांग:

1. उन थोक दवा व्यापारियों की पहचान कर लाइसेंस रद्द          किया जाए जो झोलाछापों को सप्लाई देते हैं।

2. झोलाछाप डॉक्टरों के ठिकानों पर छापेमारी कर उन्हें             तुरंत  सील किया जाए।

3. कर्तव्य में लापरवाही बरतने वाले ड्रग इंस्पेक्टरों पर                 विभागीय जांच बैठाई जाए।

सिरोही जालोर लाइव न्यूज़

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