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राजस्थान में ‘बम थ्रेट’ का रिकॉर्ड, साल 2025 में मिले 57 ईमेल, जयपुर हाई कोर्ट 40 दिनों में 4 बार निशाने पर

बम धमकी वाले ईमेल की यह बढ़ती संख्या आम लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ा रही है. जयपुर देश के बड़े शहरों के बाद 5वें स्थान पर आ चुका है, जहां इस तरह की धमकियां मिल रही हैं.

राजस्थान में ‘बम धमकी वाले ईमेल’ का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. जयपुर हाई कोर्ट से लेकर कोटा कलेक्ट्रेट और फेमस कोचिंग सेंटर तक, प्रशासनिक दफ्तर बार-बार खाली कराने पड़ रहे हैं. कहीं जांच चल रही है, कहीं कामकाज रुक रहा है और हर धमकी के बाद वही नतीजा सामने आ रहा है. सर्च तो होता है, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिलता. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर कौन है जो लगातार पूरे सिस्टम को चुनौती दे रहा है? कौन है जो 40 दिनों में 4 बार हाई कोर्ट को निशाना बना रहा है? कौन है जिसकी वजह से पुलिस, अदालतें और आम लोग लगातार डर और अनिश्चितता में जी रहे हैं?

40 दिन में हाई कोर्ट उड़ाने की 4 धमकियां

मंगलवार सुबह करीब 9 बजकर 43 मिनट पर रजिस्ट्रार सीपीसी को एक और धमकी भरा मेल मिला, जिसके बाद तुरंत राजस्थान हाई कोर्ट की बिल्डिंग खाली करा ली गई. यह पिछले 40 दिनों में हाई कोर्ट को मिली चौथी धमकी थी. धमकी मिलते ही बम स्क्वॉड, डॉग स्क्वॉड और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे. करीब ढाई घंटे तक सघन तलाशी अभियान चला. इस दौरान सभी सुनवाई स्थगित रहीं, जिससे अदालत का काम पूरी तरह से प्रभावित हुआ. दोपहर 12 बजकर 30 मिनट पर जांच एजेंसियों ने बिल्डिंग को सुरक्षित घोषित किया, लेकिन कोई विस्फोटक नहीं मिला

जयपुर हाई कोर्ट के एडवोकेट आनंद शर्मा ने इस पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, ‘बार-बार हो रही धमकियों से वकीलों और जजों में डर का माहौल है. हमारा काम प्रभावित हो रहा है, लेकिन पुलिस अभी तक मेल भेजने वाले को ट्रेस नहीं कर पाई है.’

हाई कोर्ट को इससे पहले 31 अक्टूबर, 5 दिसंबर और 8 दिसंबर को भी इसी तरह के फर्जी ईमेल मिल चुके हैं

कोटा कलेक्ट्रेट और कोचिंग सेंटर भी निशाने पर

धमकी भरे मेल का दायरा केवल न्यायिक संस्थानों तक सीमित नहीं है. दो दिन पहले कोटा में भी कलेक्ट्रेट को निशाना बनाया गया. एक ईमेल में कोटा कलेक्ट्रेट और वहां के प्रसिद्ध कोचिंग सेंटरों को उड़ाने की धमकी दी गई थी. कोटा के एडिशनल एसपी दिलीप सैनी के अनुसार, ‘धमकी मिलने के बाद पुलिस, सेना और सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सक्रिय हुईं. पूरे परिसर की तलाशी ली गई, लेकिन कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली. हालांकि, एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है, क्योंकि लाखों छात्र कोचिंग सेंटरों में पढ़ते हैं.’

सिस्टम को चुनौती, किसने दीं ये 57 धमकियां?

जयपुर, कोटा के अलावा उदयपुर, जोधपुर, अजमेर और अलवर जैसे प्रमुख जिलों के सरकारी दफ्तरों को भी इसी पैटर्न पर धमकी भरे ईमेल मिले हैं. हर बार पुलिस, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड ने तलाशी की, लेकिन नतीजा शून्य रहा—कोई विस्फोटक नहीं मिला. डीसीपी साउथ राजश्री राज वर्मा ने इस संगठित पैटर्न पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, ‘मेल भेजने का पैटर्न संगठित और तकनीकी रूप से जटिल है, इसलिए पहचान में देर हो रही है. हमारी साइबर सेल की टीम आईपी एड्रेस और लोकेशन को ट्रेस करने में जुटी है.’

साल 2025 में अब तक राजस्थान में सरकारी दफ्तरों और संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाते हुए 57 ईमेल मिल चुके हैं, जिसने दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु के बाद जयपुर को देश में ‘बम धमकी’ के मामलों में 5वें स्थान पर ला दिया है

‘साइबर सेल को और मजबूत करने की जरूरत’

एडवोकेट दीन दयाल खंडेलवाल ने प्रशासन से आग्रह किया है कि फर्जी ईमेल भेजने वाले की पहचान के लिए साइबर सेल को और मजबूत किया जाए और प्रशासनिक स्तर पर प्रवेश निरीक्षण बढ़ाने और निगरानी प्रणाली को आधुनिक बनाने की आवश्यकता है

राजस्थान प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती

तकनीकी रूप से जटिल मेल भेजने वाले संगठित गिरोह की पहचान करना.

बार-बार हो रही धमकियों के बावजूद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल बनाए रखना और लोगों के बीच विश्वास स्थापित करना

राजस्थान को अब साइबर सुरक्षा से लेकर भौतिक सुरक्षा तक, दोनों मोर्चों पर उच्च सतर्कता बरतनी होगी. पुलिस को हर धमकी को वास्तविक खतरा मानते हुए कार्रवाई करनी होगी ताकि धमकी भरे थ्रेट के सिलसिले को जल्द से जल्द रोका जा सके

सिरोही जालोर लाइव न्यूज़

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