परीक्षा के दिन कृषि अनुसंधान केंद्र के दरवाजे बंद, बाहर खड़े रोते रहे छात्र, फिर किया प्रदर्शन
जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग के हस्तक्षेप पर बच्चों को सात दिनों के लिए पुलिस लाइन में शिफ्ट किया गया और बसों की व्यवस्था की गई। ग्रामीणों ने कृषि केंद्र को कलेक्टर के आदेश न मानने पर चेतावनी दी है कि यदि सात दिन में किसान भवन में पढ़ाई शुरू नहीं की गई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

श्रीगंगानगर में 1-ई छोटी स्थित सतगुरु कॉलोनी के 150 स्कूली बच्चे अर्धवार्षिक परीक्षा देने कृषि अनुसंधान केंद्र पहुंचे तो केंद्र के अधिकारियों ने गेट को ताला जड़ दिया। जिस कारण आधे बच्चे बाहर सड़क पर खड़े रोते रहे। बच्चों की परीक्षा नहीं हो पाई। गुस्साए ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने केंद्र के बाहर धरना शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ता देख जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आनन-फानन में 7 दिन की वैकल्पिक व्यवस्था कर दी। जिसके बाद अब ये बच्चे पुलिस लाइन में पढ़ेंगे और आने-जाने के लिए तीन बसें लगाई गई हैं।
चार किलोमीटर दूर शिफ्ट किया स्कूल
दरअसल, 1-ई छोटी की सतगुरु कॉलोनी में स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है और कभी भी ढह सकता है। बच्चों की जान को खतरा देखते हुए प्रशासन ने सभी 150 बच्चों को बारहमासी नहर के पास वाले राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट कर दिया। जो सतगुरु कॉलोनी से चार किलोमीटर की दूरी पर है। बच्चों को वहां शिफ्ट किए जाने के बाद स्कूल दो शिफ्टों में संचालित होने लगा। सुबह 8 से दोपहर 12:30 तक मूल स्कूल के बच्चे, दोपहर 12:30 से शाम 6:30 तक सतगुरु कॉलोनी के बच्चे पढ़ाई करने लगे।
कृषि अनुसंधान केंद्र में पढ़ाने का आदेश दिया
सतगुरु कॉलोनी के बच्चों को इतनी दूर आने-जाने में परेशानी होती थी। कुछ दिन पहले एक बच्चे का रास्ते में एक्सीडेंट हो गया और जबड़ा टूट गया। इसके बाद ग्रामीण और जनप्रतिनिधि जिला कलेक्टर से मिले। बच्चों की परेशानी को समझ कलेक्टर ने सतगुरु कॉलोनी के पास ही स्थित कृषि अनुसंधान केंद्र के किसान भवन में बच्चों के पढ़ाई की वैकल्पिक व्यवस्था कर दी।
कलेक्टर के आदेश को दिखाया ठेंगा
गुरुवार सुबह जब बच्चे परीक्षा देने पहुंचे तो कृषि अनुसंधान केंद्र के अधिकारियों ने साफ मना कर दिया। गेट को ताला लगा दिया गया। जिसके कारण बच्चे परीक्षा से वंचित रह गए। जब ग्रामीणों को इस बात का पता चला तो वे आक्रोशित हो गए। जिसके बाद जनप्रतिनिधियों के साथ ग्रामीण कृषि अनुसंधान केंद्र के बाहर जमा हो गए और धरने पर बैठ गए। लोगों ने कृषि अनुसंधान केंद्र के बाहर जमकर नारेबाजी की। हंगामा बढ़ता देख मौके पर एसडीएम, तहसीलदार, बीईईओ, समेत तमाम अधिकारी पहुंचे। बच्चों को तुरंत 7 दिन के लिए श्रीगंगानगर पुलिस लाइन में शिफ्ट करने का फैसला लिया गया। आने-जाने के लिए तीन बसों का इंतजाम किया गया। अधिकारियों ने कहा- जब तक कृषि अनुसंधान केंद्र से लिखित अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक पुलिस लाइन में पढ़ाई होगी।
ग्रामीणों ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम
ग्रामीणों का कहना है कि कृषि अनुसंधान केंद्र के अधिकारी कलेक्टर के आदेश को भी नहीं मान रहे। अगर 7 दिन में किसान भवन में पढ़ाई शुरू नहीं हुई तो वह फिर से बड़ा आंदोलन करेंगे और कृषि केंद्र को घेरेंगे।




