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RSS समर्थित शिक्षक संगठन ने BLO पर अत्यधिक दबाव पर जताई चिंता, डेडलाइन बढ़ाने की मांग

संगठन का कहना है कि बीएलओ को रोजाना 16-18 घंटे काम करना पड़ता है. कई क्षेत्रों में नेटवर्क न चलने, ऐप में तकनीकी गड़बड़ियों, लंबी दूरी तय करने जैसी समस्याएँ काम को और कठिन बनाती हैं

बीएलओ पर SIR कार्य समय पर पूरा करने के बढ़ते दबाव को लेकर अब आरएसएस समर्थित शिक्षक संगठन भी खुलकर सामने आ गया है. अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा है कि बीएलओ पर अस्वाभाविक रूप से अधिक कार्यभार और तनाव बनाया जा रहा है, जो गंभीर चिंता का विषय है

महासंघ की सचिव प्रोफेसर गीता भट्ट द्वारा भेजे गए पत्र में 4 दिसंबर की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की गई है. 13 लाख से अधिक सदस्यों वाला यह संगठन कहता है कि बीएलओ को न तो पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध हैं और न ही बड़े पैमाने पर डेटा संग्रहण और अपलोडिंग के लिए तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया है

अधिकारियों का व्यवहार कई बार दबावपूर्ण होता है

एनडीटीवी से बातचीत में महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता ने अजमेर में बताया कि यह मांग पूरी तरह जमीनी फीडबैक पर आधारित है. उनका कहना है कि जिन वरिष्ठ अधिकारियों के अधीन बीएलओ काम करते हैं, उनका व्यवहार कई बार दबावपूर्ण होता है, जिसके कारण शिक्षक-बीएलओ भारी तनाव झेल रहे हैं. राजस्थान में ही तनाव के चलते दो आत्महत्या और कई हार्ट अटैक के मामले सामने आए हैं

बीएलओ को रोजाना 16-18 घंटे काम करना पड़ता है

संगठन का कहना है कि बीएलओ को रोजाना 16-18 घंटे काम करना पड़ता है. कई क्षेत्रों में नेटवर्क न चलने, ऐप में तकनीकी गड़बड़ियों, लंबी दूरी तय करने जैसी समस्याएँ काम को और कठिन बनाती हैं. पहाड़ी और रेगिस्तानी इलाकों में डेटा अपलोड करना लगभग असंभव हो जाता है

”संगठन SIR प्रक्रिया के खिलाफ नहीं”

शिक्षक संगठन ने स्पष्ट किया कि वे SIR प्रक्रिया के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि चाहते हैं कि इस विशाल कार्य को कर रहे बीएलओ को बेहतर सुविधाएँ, तकनीकी प्रशिक्षण और सहायक स्टाफ प्रदान किया जाए. संगठन का कहना है कि यदि संसाधन और व्यवहारिक सहयोग मिलता है, तो बीएलओ यह जिम्मेदारी कुशलता से निभा सकते हैं

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