
जोधपुर: जहाँ जोधपुर लोकसभा क्षेत्र में बिश्नोई समाज के तकरीबन 2.80 लाख मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, वहाँ कांग्रेस संगठन से इस समाज का प्रतिनिधित्व समाप्त कर देना किसी सोची-समझी साज़िश या गंभीर लापरवाही जैसा प्रतीत होता है। पर्यवेक्षक के तौर पर आये यशपाल आर्य को विभिन्न इलाक़ों से जो फीडबैक मिला, उसमें तीन नाम पैनल में प्रमुखता से भेजे गए
1.नारायण राम डाबड़ी
2.राजेंद्र चौधरी
3.गीता बरवड़
इनमें नारायणराम डाबड़ी का नाम सबसे ऊपर था
एक ऐसा नाम जिस पर जोधपुर ग्रामीण कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ताओं ने भी तस्दीक की और जो वर्षों से पार्टी को मज़बूत करने में खिदमत-ए-ख़ास निभाते रहे। सात–आठ सालों से उन्होंने ग्रामीण इलाक़ों में संगठन को खड़ा करने, मीटिंगें आयोजित करने और कार्यकर्ताओं को जोड़ने में जो मेहनत की, वह किसी से पिन्हाँ (छिपी) नहीं है।
लेकिन अचानक जारी हुई सूची में उनका नाम ग़ायब कर देना
न सिर्फ़ कार्यकर्ताओं की भावनाओं पर गंभीर चोट है, बल्कि यह संदेश देता है कि संगठन में मेहनत और जमीनी निष्ठा को कोई क़द्र-ओ-कीमत नहीं मिल रही। जोधपुर ग्रामीण में यह फ़ैसला रोष, रंजिश और बदगुमानी पैदा कर रहा है, जिसकी राजनीतिक कीमत कांग्रेस को भविष्य में चुकानी पड़ेगी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी से आग्रह है कि इस मसले पर दुबारा ग़ौर-व-फ़िक्र किया जाए और कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान की बहाली के लिए निर्णय पर पुनर्विचार करे।




