वकील पर लात-घूंसे बरसाए, SDM ऑफिस के बाहर हंगामा; नगरपालिका की करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप
आहोर में नगरपालिका की करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जे के आरोपों को लेकर शुरू हुआ विवाद वकील पर हमले तक पहुंच गया। धरने के दौरान दो बार तनाव बढ़ा। पुलिस ने तीन लोगों को हिरासत में लिया और मामले की जांच जारी है।

जालौर में आहोर नगरपालिका की करोड़ों रुपये मूल्य वाली जमीन पर अवैध कब्जे के आरोपों को लेकर शनिवार सुबह बड़ा विवाद खड़ा हो गया। शिवसेना (उद्धव गुट) जिला अध्यक्ष रूपराज राजपुरोहित इस जमीन को बचाने की मांग के साथ एसडीएम ऑफिस के बाहर धरने पर बैठे थे। इसी दौरान वहां पहुंचे कुछ व्यक्तियों और राजपुरोहित के बीच नोकझोंक बढ़ने लगी। मामले की जानकारी मिलने पर थानाधिकारी करण सिंह पुलिस टीम के साथ पहुंचे और धरने की अनुमति न होने पर उन्हें समझाइश दी। विवाद बढ़ने पर पुलिस राजपुरोहित और जमीन पर मालिकाना हक का दावा करने वाले वागपुरी को हिरासत में लेकर थाने ले गई।
दोपहर में फिर बढ़ा तनाव, वकील पर लात-घूंसे बरसाए
मामला शांत होता दिख ही रहा था कि करीब दोपहर 1:30 बजे एसडीएम ऑफिस के बाहर फिर हंगामा हो गया। वकील अभिताभ सिंह पर अचानक पीछे से आए कुछ अज्ञात लोगों ने धक्का-मुक्की की और लात-घूंसे बरसाकर मौके से भाग निकले। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एक युवक को हिरासत में ले लिया, जबकि अन्य आरोपी फरार हो गए।
वकील ने भू-माफियाओं पर आरोप लगाए, स्थानीयों में रोष
वकील अभिताभ सिंह ने बताया कि नगरपालिका के खसरा नंबर 1008-1009 की यह जमीन करोड़ों रुपये की है, जिसे 2 जून 1977 को तेजाराम ने नगर पालिका को दान किया था। उनका कहना है कि भू-माफिया इस भूमि पर अवैध कब्जे की कोशिश कर रहे हैं, जिसके विरोध में वह और शिवसेना जिला अध्यक्ष शांतिपूर्वक धरने पर बैठे थे। आरोप है कि दबाव में आकर प्रशासन ने टेंट तुड़वाया और जिला अध्यक्ष को हिरासत में लिया, इसके बाद कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग और वकील बड़ी संख्या में आहोर थाने पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
थानाधिकारी करण सिंह ने बताया कि शांति भंग करने के आरोप में दो लोगों को और मारपीट में शामिल एक युवक को डिटेन किया गया है। रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। नगरपालिका ईओ राकेश दवे ने कहा कि यह जमीन विवाद पहले से न्यायालय में विचाराधीन है और अदालत के आदेशों के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।



