
– यातायात एवं परिवहन प्रभाग की रिट्रीट में वरिष्ठ पदाधिकारियों का सम्मान समारोह आयोजित
– प्रभाग के देशभर से आए पदाधिकारियों का किया गया सम्मान
आबूरोड। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान के यातायात एवं परिवहन प्रभाग की ओर से आयोजित सिल्वर रिफ्लेक्शन रिट्रीट में सोमवार को सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें प्रभाग से जुड़े देशभर के वरिष्ठ पदाधिकारियों का राजस्थानी पगड़ी, शॉल, माला पहना कर और स्मृति चिंहृ देकर सम्मान किया गया। मुख्य अतिथि उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक अमिताभ ने कहा कि यह समय भारत और पूरे विश्व के लिए सौभाग्यपूर्ण समय है। बहुत जल्द रामराज्य आएगा और भारत लीड करेगा। हम लोग इस पृथ्वी पर इस जन्म में अपनी यात्रा पर हैं। सभी अपना-अपना रोल अदा कर रहे हैं। इसलिए अपना रोल बेहतर अदा करें। ब्रह्माकुमारी बहनें सेवा की यात्रा पर हैं। उन्होंने अपना जीवन जन कल्याण के लिए लगाया है। सेवा करने के बहुत तरीके हैं, अपने रोल को अदा करने के बहुत तरीके हैं। इस शरीर में विद्यमान हम सभी आत्मा हैं। सभी आत्माओं का स्वरूप एक जैसा है। ब्रह्माकुमारीज़ के हर शहर में सेवाकेंद्र हैं, आप सभी अपने स्थानीय सेवाकेंद्र पर जाकर आध्यात्मिक ज्ञान का लाभ लें और मेडिटेशन जरूर सीखें।

प्रभाग की अध्यक्ष राजयोगिनी बीके दिव्यप्रभा दीदी ने कहा कि मैंने जब से इस ईश्वरीय विश्व विद्यालय से जुड़ी हूं तो मन कभी विचलित नहीं होता है। क्योंकि परमात्मा हमें सिखाते हैं जैसा हम सोचते हैं, वैसा बनते जाते हैं। मेडिटेशन से हमारा मन सशक्त होता जाता है। इससे विपरीत परिस्थिति में हम विचलित नहीं होते हैं। जब हम परमात्मा को आधार बनाकर और उन्हें हर कार्य में आगे रखते हुए जीवन में चलते हैं तो सफलता निश्चित रूप से मिलती है। भगवान तो सुखदाता है, सुख देने वाला है। भगवान कभी किसी को दुख नहीं देते हैं। दुख तो हमें अपने कर्मों के आधार पर मिलता है। जब हम एक-दूसरे को आत्मिक रूप से देखकर चलेंगे तो हमारा दृष्टिकोण दुनिया के प्रति सकारात्मक होगा। जीवन में आनंद आएगा।

अतिरिक्त महासचिव बीके करुणा भाई ने कहा कि प्रभाग द्वारा देशभर में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता लाने के लिए अनुकरणीय कार्य किया जा रहा है। अतिरिक्त महासचिव डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने कहा कि आप सभी इसी तरह सेवाओं को आगे बढ़ाते रहें और जन-जन को जागरूक करते रहें।

खुशी का आधार है देना-
प्रेरक वक्ता प्रो. ईवी गिरीश ने कहा कि खुशी का आधार है देना। जब हम जीवन में देना सीख जाते हैं तो जीवन में खुशी आने लगती है। देना ही लेना है। देने की भावना हमारा स्वाभाविक संस्कार होना चाहिए। जब हम सदा देने का भाव रखेंगे तो स्वाभाविक रूप से हमारे अंदर खुशी बढ़ेगी। जब हम प्यार सम्मान, शांति, रिस्पेक्ट, देने का भाव रखते हैं तो इन सबका सोर्स है मेडिटेशन। जब हम परमात्मा से कनेक्ट रहते हैं तो आत्मा के स्वाभाविक गुण- प्रेम, सुख, शांति, ज्ञान, पवित्रता, शक्ति और आनंद स्वत: प्रकट होने लगते हैं। क्योंकि आत्मा के जो गुण हैं वही परमात्मा के गुण और शक्तियां हैं। उपाध्यक्ष डॉ. बीके सुरेश भाई ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन बीके किंजल बहन ने किया। इस दौरान सभी को एआई जनरेटेड सुहाना सफर मूवी दिखाई गई। नुक्कड़ नाटक से सड़क-यातायात सुरक्षा का संदेश दिया गया।




