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डीएनटी जातियों की दो टूक, मांगे नहीं मानी तो निकाय और पंचायत चुनाव का करेंगे बहिष्कार

जयपुर: अपनी 10 से ज्यादा मांगों को लेकर घुमंतु अर्ध घुमंतु विमुक्त (डीएनटी) जातियों से जुड़े हजारों लोगों ने मंगलवार को राजधानी के मानसरोवर स्थित जिला ग्राउंड में महा बहिष्कार आंदोलन शुरू कर दिया. डीएनटी जातियों से जुड़े प्रतिनिधियों ने सरकार को चेताया कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो आगामी निकाय और पंचायत का पूरी तरीके से डीएनटी समाज बहिष्कार करेगा.

घुमंतु अर्ध घुमंतु विमुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष लाल जी राईका ने कहा कि आज डीएनटी के तहत शामिल 50 से ज्यादा जातियों से जुड़े लोग जयपुर में इकट्ठा हुए हैं. डीएनटी समाज का एक ही मकसद है कि उनके लिए अलग से आरक्षण लागू किया जाए. उन्होंने कहा कि डीएनटी समाज में कोई आईएएस-आईपीएस नहीं है और न ही कोई हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का जज है, इसलिए उन्हें अलग से आरक्षण दिया जाए. उन्होंने कहा कि राजनीति में भी डीएनटी समाज को 10 फीसदी आरक्षण मिलना चाहिए. प्रदेश में डीएनटी की आबादी 15% और देश में 10% है. इसलिए उन्हें राजनीति में आरक्षण मिलना चाहिए, अगर किसी जिले में 100 सरपंच हैं, तो उनमें से 10 सरपंच डीएनटी समाज से होने चाहिए.

गोचर और वन भूमि पर ही मिले आवास:

लाल जी राईका ने कहा कि डीएनटी समाज के लोग गांव से बाहर गोचर और वन क्षेत्र में रहते हैं. इसलिए उन्हें गोचर और वन भूमि में ही 300 गज का प्लॉट मिलना चाहिए. अगर शहर में है तो शहर में 100 गज का प्लॉट मिलना चाहिए. राईका ने आरोप कहा कि आजादी से लेकर अब तक हम 5 लाख करोड़ का टैक्स दे चुके हैं, लेकिन उसका 10% भी डीएनटी समाज पर खर्च नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि हमने पहला आंदोलन पाली में, दूसरा जोधपुर और अब तीसरा जयपुर में कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम तब तक महा बहिष्कार आंदोलन खत्म नहीं करेंगे, जब तक की सरकार हमारी मांगों को नहीं मान लेती है.

सरकार पुलिस के जरिए हमारी आवाज को दबाना चाहती है:

घुमंतु अर्ध घुमंतु विमुक्त जाति परिषद के अध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया ने कहा कि जयपुर में हमारे आंदोलन को सरकार पुलिस के जरिए दबाना चाहती है, लेकिन हम दबने वाले नहीं हैं. हम तब तक नहीं उठेंगे जब तक कि सरकार के प्रतिनिधि हमसे इसी मंच पर आकर बात नहीं करते हैं और हमारी मांगों को स्वीकार नहीं करते हैं. आगामी दिनों में हर गांव, शहर और कस्बे में हम आंदोलन करेंगे, अगर सरकार नहीं मानती है, तो निकाय-पंचायत चुनाव का बहिष्कार करेंगे. उन्होंने कहा कि डीएनटी जातियों के अगर कोई योजना आती भी है, तो वह एनजीओ में जाकर मर्ज होता हो जाती है.

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