50 दिन में 50 गांव और 50 स्कूल किए कवर, 15 हजार पौधे रोपे
- ब्रह्माकुमारीज़ की ओर से चलाया जा रहा है वृक्षवंदन पौधारोपण अभियान - निजी-सरकारी स्कूलों, किसानों, ग्राम पंचायत के साथ मिलकर पौधारोपण जारी - 14 जंक्शन पाइंट से पौधे किए जा रहे वितरित, पांच टीमें जुटीं

आबूरोड (राजस्थान)। ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की ओर से चलाए जा रहे वृक्षवंदन पौधारोपण अभियान के तहत पिछले 50 दिन में आबू रोड सहित आसपास के 50 गांवों को कवर किया गया है। इसके तहत 50 निजी व सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों को पौधे वितरित किए गए। साथ ही स्कूल मैदान में भी पौधारोपण किया गया। संस्थान की ओर से पौधारोपण अभियान को सफल बनाने के लिए पांच टीमें बनाईं गई हैं। आमजन और किसानों को पौधे वितरित करने के लिए 14 जंक्शन पाइंट बनाए गए हैं।
वृक्षवंदन अभियान की डॉ. जमिला बहन ने बताया कि 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर अभियान की शुरुआत की गई थी। तब से लेकर भाई-बहनें पूरे उमंंग-उत्साह के साथ गांव-गांव जाकर किसानों, आमजन के साथ पौधारोपण कर रहे हैं। सभी को पौधों की रक्षा करने का संकल्प भी कराया जाता है। अभियान के तहत 20 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके एवज में अब तक 50 दिन में 15 हजार से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं। समापन 25 अगस्त को पूर्व मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि के 18वें पुण्य स्मृति दिवस पर किया जाएगा।

किसानों को बांटे फलदार पौधे-
अभियान के तहत गांव-गांव जाकर किसानों को फलदार पौधे वितरित किए जा रहे हैं। साथ ही मौके पर ही पौधारोपण कर उनकी सुरक्षा करने का संकल्प कराया जा रहा है। इसके अलावा कई ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव के साथ मिलकर अभियान को चलाया जा रहा है। अभियान के समापन के बाद भी लगाए गए पौधों की मॉनिटरिंग की जाएगी और जो व्यक्ति उन्हें सुरक्षित रखेगा उनका सम्मान किया जाएगा।

20 हजार पौधे लगाने का है लक्ष्य-
वृक्षवंदन अभियान के तहत संस्थान द्वारा आबूरोड सहित आसपांस के गांवों, सरकारी संस्थाओं, स्कूलों के माध्यम से 20 हजार फलदार, छायादार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके एवज में 15 हजार पौधारोपण का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। बता दें कि ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा लगातार पिछले तीन साल से बारिश के मौसम में वृक्षवंदन अभियान चलाकर पौधारोपण किया जाता है। साथ ही लोगों को पर्यावरण का महत्व बताते हुए उसकी रक्षा करने का संकल्प कराया जाता है। अभियान को सफल बनाने में मुख्य रूप से तपोवन के बीके लल्लन भाई, बीके महिमा बहन, बीके चंद्रेश भाई, बीके मोहन भाई, मानपुर की बीके सीमा बहन, बीके गीता बहन सहित अन्य भाई-बहनों का सराहनीय योगदान रहा है।




